Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 9th Feb 2025

    तमाम दश्त ही!

    ये एक अब्र का टुकड़ा कहाँ कहाँ बरसे,तमाम दश्त ही प्यासा दिखाई देता है| शकेब जलाली

  • 9th Feb 2025

    साया दिखाई देता है!

    बुरा न मानिए लोगों की ऐब-जूई का,उन्हें तो दिन का भी साया दिखाई देता है| शकेब जलाली

  • 9th Feb 2025

    शजर पे एक ही!

    न इतनी तेज़ चले सर-फिरी हवा से कहो,शजर पे एक ही पत्ता दिखाई देता है| शकेब जलाली

  • 9th Feb 2025

    जहाँ तलक भी ये !

    जहाँ तलक भी ये सहरा दिखाई देता है,मिरी तरह से अकेला दिखाई देता है| शकेब जलाली

  • 9th Feb 2025

    परंपरा!

    आज मैं देश के श्रेष्ठ हिंदी कवि और राष्ट्रकवि के रूप में ख्याति प्राप्त स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता – परंपरा को अंधी लाठी से…

  • 8th Feb 2025

    ज़िंदगी ज़ुल्फ़ तिरी !

    न तो दम लेती है तू और न हवा थमती है,ज़िंदगी ज़ुल्फ़ तिरी कोई सँवारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Feb 2025

    अरमान सभी ख़ाक!

    दिल बुझा जितने थे अरमान सभी ख़ाक हुए,राख में फिर ये चमकते हैं शरारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Feb 2025

    पुकारे तो पुकारे कैसे!

    हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में,कोई उस को जो पुकारे तो पुकारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Feb 2025

    क्या जाने सितारे कैसे!

    हाथ को हाथ नहीं सूझे वो तारीकी थी,आ गए हाथ में क्या जाने सितारे कैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Feb 2025

    इन सराबों पे कोई!

    हम ने ढूँडें भी तो ढूँडें हैं सहारे कैसे,इन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे| जावेद अख़्तर

←Previous Page
1 … 496 497 498 499 500 … 1,529
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar