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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Feb 2025

    तिरे सितम से मैं !

    तिरे सितम से मैं ख़ुश हूँ कि ग़ालिबन यूँ भी,मुझे वो शामिल-ए-अरबाब-ए-इम्तियाज़ करे| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    जो चाहे आपका!

    ख़िरद का नाम जुनूँ पड़ गया जुनूँ का ख़िरद,जो चाहे आप का हुस्न-ए-करिश्मा-साज़ करे| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    तिरे जुनूँ का ख़ुदा!

    दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर दिया आज़ाद,तिरे जुनूँ का ख़ुदा सिलसिला दराज़ करे| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    निगाह-ए-यार जिसे!

    निगाह-ए-यार जिसे आश्ना-ए-राज़ करे,वो अपनी ख़ूबी-ए-क़िस्मत पे क्यूँ न नाज़ करे| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    वो आए मगर आए!

    वो आए मगर आए किस वक़्त ‘हसरत’,कि हम चल बसे मरहबा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    बुरा कहते कहते!

    अजब क्या जो है बद-गुमाँ सब से वाइज़,बुरा सुनते सुनते बुरा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    माजरा कहते कहते!

    ख़बर उन को अब तक नहीं मर मिटे हम,दिल-ए-ज़ार का माजरा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    फ़साना तिरी याद का!

    शब-ए-ग़म किस आराम से सो गए हैं,फ़साना तिरी याद का कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    बेवफ़ा कहते कहते!

    मिरा इश्क़ भी ख़ुद-ग़रज़ हो चला है, तिरे हुस्न को बेवफ़ा कहते कहते| हसरत मोहानी

  • 6th Feb 2025

    अनुभूति!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा छायावाद युग के एक स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। पंत जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                     लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता – तुम आती हो,नव अंगों काशाश्वत मधु-विभव लुटाती हो। बजते नि:स्वर…

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