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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Feb 2025

    वो सियासत का!

    वो सियासत का इलाक़ा है उधर मत जाना, आबरू कूचा-ए-बद-नाम में बिक जाती है| मुनव्वर राना

  • 4th Feb 2025

    चाय जैसी भी हो!

    शे’र जैसा भी हो इस शहर में पढ़ सकते हो,चाय जैसी भी हो आसाम में बिक जाती है| मुनव्वर राना

  • 4th Feb 2025

    सल्तनत तक मिरे!

    आप क्या मुझ को नवाज़ेंगे जनाब-ए-आली,सल्तनत तक मिरे इनआ’म में बिक जाती है| मुनव्वर राना

  • 4th Feb 2025

    आराम में बिक जाती!

    छाँव मिल जाए तो कम दाम में बिक जाती है,अब थकन थोड़े से आराम में बिक जाती है| मुनव्वर राना

  • 4th Feb 2025

    आख़री मोहब्बत हो!

    दास्ताँ ख़त्म होने वाली है,तुम मिरीआख़री मोहब्बत हो| जौन एलिया

  • 4th Feb 2025

    तुम तो ख़ुद से भी!

    किस लिए देखती हो आईना,तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो| जौन एलिया

  • 4th Feb 2025

    किस तरह छोड़ दूँ!

    किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ,तुम मिरी ज़िंदगी की आदत हो| जौन एलिया

  • 4th Feb 2025

    कैसे अंगड़ाई से!

    तुम हो अंगड़ाई रंग-ओ-निकहत की,कैसे अंगड़ाई से शिकायत हो| जौन एलिया

  • 4th Feb 2025

    तुम हो ख़ुशबू के!

    तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू,और उतनी ही बे-मुरव्वत हो| जौन एलिया

  • 4th Feb 2025

    मर ही जाऊँ जो!

    मैं तुम्हारे ही दम से ज़िंदा हूँ,मर ही जाऊँ जो तुम से फ़ुर्सत हो| जौन एलिया

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