-
चाय जैसी भी हो!
शे’र जैसा भी हो इस शहर में पढ़ सकते हो,चाय जैसी भी हो आसाम में बिक जाती है| मुनव्वर राना
-
सल्तनत तक मिरे!
आप क्या मुझ को नवाज़ेंगे जनाब-ए-आली,सल्तनत तक मिरे इनआ’म में बिक जाती है| मुनव्वर राना
-
आराम में बिक जाती!
छाँव मिल जाए तो कम दाम में बिक जाती है,अब थकन थोड़े से आराम में बिक जाती है| मुनव्वर राना