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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Feb 2025

    आबरू कुछ तो!

    उन से कुछ तो मिला वो ग़म ही सही,आबरू कुछ तो रह गई दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    बेकली हमने देख ली!

    चैन से महव-ए-ख़्वाब-ए-नाज़ में वो,बेकली हम ने देख ली दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    जो नहीं जानते !

    मिल चुकी हम को उन से दाद-ए-वफ़ा,जो नहीं जानते लगी दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    राजा के पोखर में!

    आज मैं हिंदी के वरिष्ठ कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – ऊपर ऊपर लाल मछलियाँनीचे ग्राह बसे।राजा के पोखर में हैपानी की थाह किसे। जलकर राख…

  • 13th Feb 2025

    बात रह गई दिल की!

    याद हर हाल में रहे वो मुझे, अल-ग़रज़ बात रह गई दिल की| हसरत मोहानी

  • 13th Feb 2025

    ग़म से वाबस्ता है!

    ख़ू है अज़-बस कि आशिक़ी दिल की,ग़म से वाबस्ता है ख़ुशी दिल की| हसरत मोहानी

  • 13th Feb 2025

    उड़ गई मुफ़्त में!

    आप ने क़द्र कुछ न की दिल की,उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की| हसरत मोहानी

  • 13th Feb 2025

    टूटता रहता हूँ!

    मेरी दीवार को तू कितना सँभालेगा ‘शकील’,टूटता रहता हूँ हर गाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 13th Feb 2025

    तू भी खो जाएगी!

    तू भी खो जाएगी टपके हुए आँसू की तरह,देख ऐ गर्दिश-ए-अय्याम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

  • 13th Feb 2025

    अपनी ख़ुशियाँ मिरे!

    अपनी ख़ुशियाँ मिरे आलाम से मंसूब न कर,मुझ से मत माँग मिरा नाम मिरे साथ न चल| शकील आज़मी

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