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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Feb 2025

    फिर ख़्वाब अगर!

    कुछ दिन तो बसो मिरी आँखों में,फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

  • 16th Feb 2025

    वापसी

    लौटकर वापस गोवा आ गया हूँ, आगे का संवाद गोवा से ही होगा।

  • 15th Feb 2025

    आरज़ू यही हसरत!

    हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत,जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 15th Feb 2025

    तन्हाइयों में जल जाए!

    मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ,जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 15th Feb 2025

    कि जाने कौन कहाँ!

    मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा,कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 15th Feb 2025

    शारजाह लाइट विलेज

    आज हम शारजाह लाइट फेस्टिवल देखने गए, वहाँ भ्रमण के दो चित्र और वहाँ से दुबई वापसी का एक चित्र शेयर कर रहा हूँ – अंतिम चित्र अल फुर्जान मैट्रो स्टेशन का है। ऊपर एक चित्र अल फुर्जान मेट्रो स्टेशन के अंदर का है और अंतिम चित्र घर के भीतर से रात्रि के समय लिया…

  • 15th Feb 2025

    मिले हैं यूँ तो बहुत!

    मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी, कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 15th Feb 2025

    अब इस क़दर भी न!

    अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए| उबैदुल्लाह अलीम

  • 14th Feb 2025

    बात बन गई दिल की!

    वो जो बिगड़े रक़ीब से ‘हसरत’,और भी बात बन गई दिल की| हसरत मोहानी

  • 14th Feb 2025

    आरज़ू तुम से!

    मर मिटे हम न हो सकी पूरी,आरज़ू तुम से एक भी दिल की| हसरत मोहानी

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