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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Sep 2024

    सूनी साँझ!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के अत्यंत वरिष्ठ एवं श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की एक कविता  शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिव मंगल सिंह सुमन जी की यह कविता  –  बहुत दिनों में आज…

  • 6th Sep 2024

    क्या सोच के हम !

    बढ़ती ही चली जाती है तन्हाई हमारी,क्या सोच के हम वादी-ए-इंकार में आए| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    ये आग हवस की है!

    ये आग हवस की है झुलस देगी इसे भी,सूरज से कहो साया-ए-दीवार में आए| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    देर से बाज़ार में आए!

    उम्मीद से कम चश्म-ए-ख़रीदार में आए,हम लोग ज़रा देर से बाज़ार में आए| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    सच मुझे लिखना है!

    ता-कि महफ़ूज़ रहे मेरे क़लम की हुरमत,सच मुझे लिखना है मैं हुस्न को सच लिक्खूंगा| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    सोचता रोज़ हूँ मैं!

    शाम होते ही खुली सड़कों की याद आती है,सोचता रोज़ हूँ मैं घर से नहीं निकलूँगा| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    हिज्र की शब बदलूँगा!

    मेरी तन्हाई की रुस्वाई की मंज़िल आई,वस्ल के लम्हे से मैं हिज्र की शब बदलूँगा| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा!

    देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है,आँख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूँगा| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    दरवाज़ा खुला रक्खूँगा!

    तेरे वा’दे को कभी झूट नहीं समझूँगा,आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा| शहरयार

  • 6th Sep 2024

    समय पर कविता- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

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