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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Feb 2025

    चुप रह के बहारों ने!

    माना कि थी ग़मगीन कली ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ से,चुप रह के बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 22nd Feb 2025

    मदहोश इशारों ने भी!

    किस तरह करें तुझ से गिला तेरे सितम का,मदहोश इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 22nd Feb 2025

    इस डूबते सूरज से तो!

    इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी,हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 22nd Feb 2025

    ख़ामोश किनारों ने भी!

    तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना,ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 22nd Feb 2025

    पुर-कैफ़ बहारों ने भी!

    पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है,हाँ उन के नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श

  • 22nd Feb 2025

    बन गई नक़्श जो!

    बन गई नक़्श जो सुर्ख़ी तिरे अफ़्साने की,वो शफ़क़ है कि धनक है कि हिना है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 22nd Feb 2025

    वो बशर है कि!

    दिल ख़तावार-ए-नज़र पारसा तस्वीर-ए-अना,वो बशर है कि फ़रिश्ता है ख़ुदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 22nd Feb 2025

    ये तिरा नाज़ है

    होश में ला के मिरे होश उड़ाने वाले,ये तिरा नाज़ है शोख़ी है अदा है क्या है| नक़्श लायलपुरी

  • 22nd Feb 2025

    यों अन्धेरा अभी पी रहा हूँ!

    आज मैं हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। शंभुनाथ जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत –  यों अन्धेरा अभी पी रहा हूँ,        रोशनी के लिए जी रहा हूँ । एक अन्धे…

  • 21st Feb 2025

    नाम होंटों पे तिरा!

    नाम होंटों पे तिरा आए तो राहत सी मिले,तू तसल्ली है दिलासा है दुआ है क्या है| नक़्श लायलपुरी

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