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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Feb 2025

    बेवफ़ाई का ज़माना है!

    बेवफ़ाई का ज़माना है मगर आप ‘हफ़ीज़’,नग़्मा-ए-मेहर-ओ-वफ़ा सब को सुनाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 26th Feb 2025

    आप काँटे मिरी राहों!

    फूल बिखराता हुआ मैं तौ चला जाऊँगा,आप काँटे मिरी राहों में बिछाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 26th Feb 2025

    मनाना है मनाते रहिए!

    रूठना भी है हसीनों की अदा में शामिल,आप का काम मनाना है मनाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 26th Feb 2025

    हँसते हँसाते रहिए!

    ज़िंदगी दर्द की तस्वीर न बनने पाए,बोलते रहिए ज़रा हँसते हँसाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 26th Feb 2025

    ज़िन्दगी अपनी हुई है!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीत कवि स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। माहेश्वर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत – चीख़ बनते जा रहेहम सब खदानों कीहो गए हैं शोकधुनबजते पियानो की । कल…

  • 25th Feb 2025

    नाज़ उठाते रहिए!

    ज़िंदगी भी किसी महबूब से कुछ कम तो नहीं, प्यार है उस से तो फिर नाज़ उठाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 25th Feb 2025

    दौलत-ए-इश्क़!

    दौलत-ए-इश्क़ नहीं बाँध के रखने के लिए,इस ख़ज़ाने को जहाँ तक हो लुटाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 25th Feb 2025

    आवाज़ मिलाते रहिए!

    दिल की आवाज़ में आवाज़ मिलाते रहिए,जागते रहिए ज़माने को जगाते रहिए| हफ़ीज़ बनारसी

  • 25th Feb 2025

    आपस में लड़ोगे तुम!

    रिंदों को ‘हफ़ीज़’ इतना समझा दे कोई जा कर,आपस में लड़ोगे तुम वाइ’ज़ का भला होगा| हफ़ीज़ बनारसी

  • 25th Feb 2025

    दीवाने से दीवाना!

    फ़र्ज़ानों का क्या कहना हर बात पे लड़ते हैं,दीवाने से दीवाना शायद ही लड़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी

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