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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Feb 2025

    आइना देखा करो!

    तैश में आने लगे तुम तो मिरी तन्क़ीद पर, इस क़दर हस्सास हो तो आइना देखा करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    ईमान का सौदा करो!

    रहनुमा ये दर्स हम को दे रहे हैं आज-कल,बेच दो सच्चाइयाँ ईमान का सौदा करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    हादसों का ख़ौफ़ ले!

    ज़िंदगी के नाम-लेवा मौत से डरते नहीं,हादसों का ख़ौफ़ ले कर घर से मत निकला करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    फूल कहते हैं तुम्हें!

    ख़ुद को पोशीदा न रक्खो बंद कलियों की तरह,फूल कहते हैं तुम्हें सब लोग तो महका करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    ख़ून से उजला करो!

    दुख अँधेरों का अगर मिटता नहीं है ज़ेहन से,रात के दामन को अपने ख़ून से उजला करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    ख़्वाब मत देखा करो!

    ज़िंदगी जीने का पहले हौसला पैदा करो, सिर्फ़ ऊँचे ख़ूबसूरत ख़्वाब मत देखा करो| मंज़र भोपाली

  • 28th Feb 2025

    कभी पत्थर के दिल!

    कभी पत्थर के दिल ऐ ‘कैफ़’ पिघले हैं न पिघलेंगे,मुनाजातों से फ़रियादों से चीख़ों से पुकारों से| कैफ़ भोपाली

  • 28th Feb 2025

    दशहरे से दिवाली से!

    वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअ’ल्लुक़ था,दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से| कैफ़ भोपाली

  • 28th Feb 2025

    क्यों आखिर क्यों?

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ संपादक एवं कवि स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैया लाल नंदन जी का यह गीत – हो गई क्या हमसेकोई भूल?बहके-बहके लगने लगे फूल! अपनी समझ में…

  • 27th Feb 2025

    दिलासों से सहारों से!

    ज़माने में कभी भी क़िस्मतें बदला नहीं करतीं,उमीदों से भरोसों से दिलासों से सहारों से| कैफ़ भोपाली

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