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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Mar 2025

    इक नज़र भी तिरी!

    देख तू आन के चेहरा मेरा,इक नज़र भी तिरी क्या करती है| परवीन शाकिर

  • 3rd Mar 2025

    तस्वीर बना करती है!

    मुसहफ़-ए-दिल पे अजब रंगों में,एक तस्वीर बना करती है| परवीन शाकिर

  • 3rd Mar 2025

    एक खिड़की!

    आज मैं हिंदी के आधुनिक कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। वाजपेयी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – मौसम बदले, न बदलेहमें उम्मीद कीकम से कमएक खिड़की तो खुली रखनी चाहिए। शायद कोई…

  • 2nd Mar 2025

    उस ने देखा ही नहीं!

    उस ने देखा ही नहीं वर्ना ये आँख, दिल का अहवाल कहा करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    ज़िंदगी मेरी थी!

    ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो,तेरे कहने में रहा करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    दिल को उस राह पे!

    दिल को उस राह पे चलना ही नहीं,जो मुझे तुझ से जुदा करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    हम ने देखी है वो!

    हम ने देखी है वो उजली साअ’त,रात जब शेर कहा करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    सिर्फ़ दुआ करती है!

    अब्र बरसे तो इनायत उस की,शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    ख़ुश्बू को रिहा करती!

    खोल कर बंद-ए-क़बा गुल के हवा,आज ख़ुश्बू को रिहा करती है| परवीन शाकिर

  • 2nd Mar 2025

    चूम कर फूल को!

    चूम कर फूल को आहिस्ता से,मो’जिज़ा बाद-ए-सबा करती है| परवीन शाकिर

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