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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Mar 2025

    ख़ुशियों का लोभ!

    हम को इन सस्ती ख़ुशियों का लोभ न दो,हम ने सोच समझ कर ग़म अपनाया है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Mar 2025

    सदियों से इंसान!

    सदियों से इंसान ये सुनता आया है,दुख की धूप के आगे सुख का साया है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Mar 2025

    ग़रज़-परस्त जहाँ में !

    ग़रज़-परस्त जहाँ में वफ़ा तलाश न कर,ये शय बनी थी किसी दूसरे जहाँ के लिए| साहिर लुधियानवी

  • 4th Mar 2025

    गोवा और पर्यटन

    पिछले दिनों कुछ इस प्रकार की चिंता व्यक्त की गई कि गोवा में विदेशी पर्यटकों का आना काफी कम हुआ है। मुझे इस विषय में अधिक जानकारी नहीं है लेकिन क्योंकि मैं गोवा में ही रहता हूँ इसलिए मुझे इस बात की चिंता है कि गोवा में अधिक पर्यटक आने चाहिएं और मेरा ध्यान कुछ…

  • 3rd Mar 2025

    वो शाख़ ही न रही!

    पलट के सू-ए-चमन देखने से क्या होगा,वो शाख़ ही न रही जो थी आशियाँ के लिए| साहिर लुधियानवी

  • 3rd Mar 2025

    न तू ज़मीं के लिए!

    न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए,तिरा वजूद है अब सिर्फ़ दास्ताँ के लिए| साहिर लुधियानवी

  • 3rd Mar 2025

    बात कुछ और!

    दुख हुआ करता है कुछ और बयाँ,बात कुछ और हुआ करती है| परवीन शाकिर

  • 3rd Mar 2025

    हाल जो तेरा अना!

    मुझ से भी उस का है वैसा ही सुलूक,हाल जो तेरा अना करती है| परवीन शाकिर

  • 3rd Mar 2025

    फ़ैसला सिर्फ़ हवा!

    मसअला जब भी चराग़ों का उठा,फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है| परवीन शाकिर

  • 3rd Mar 2025

    किसी शख़्स की याद!

    शाम पड़ते ही किसी शख़्स की याद, कूचा-ए-जाँ में सदा करती है| परवीन शाकिर

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