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तिनका तिनका काँटे!
तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की,क्यूँ इतनी लम्बी होती है चाँदनी रात जुदाई की| गुलज़ार
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सुंदरियो!
आज एक बार फिर मैं विख्यात आंचलिक उपन्यास एवं कहानी लेखक और कवि स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रेणु जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की यह कविता – सुंदरियो-यो-योहो-होअपनी-अपनी छातियों परदुद्धी फूल के झुके…
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अब कहाँ मुझ में!
अब समझने लगा हूँ सूद-ओ-ज़ियाँ*,अब कहाँ मुझ में वो जुनूँ साहब| *Profit and Loss जावेद अख़्तर
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कल और आज !
आज एक बार फिर मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बाबा नागार्जुन जी की यह कविता – अभी कल तकगालियॉं देती तुम्हेंहताश खेतिहर,अभी कल तकधूल में नहाते थेगोरैयों के झुंड,अभी कल तकपथराई हुई…