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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Sep 2024

    दीवाना-पन भी है!

    अक़्ल-ए-मआश ओ हिकमत-ए-दुनिया के बावजूद,हम को अज़ीज़ इश्क़ का दीवाना-पन भी है| जाँ निसार अख़्तर

  • 13th Sep 2024

    इस में कुछ करिश्मा!

    माना कि रंग रंग तिरा पैरहन भी है,पर इस में कुछ करिश्मा-ए-अक्स-ए-बदन भी है| जाँ निसार अख़्तर

  • 13th Sep 2024

    गीतों का बादल!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय के विख्यात गीतकार स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत  शेयर कर रहा हूँ| अवस्थी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत  –  मैं गीत बरसाने वाला बादल हूँ ।प्यासे नयनों में हँसता काजल…

  • 12th Sep 2024

    परिंदे के बाल-ओ!

    एक गोली गई थी सू-ए-फ़लक,इक परिंदे के बाल-ओ-पर आए| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    चंद लम्हे जो लौटकर!

    चंद लम्हे जो लौट कर आए,रात के आख़िरी पहर आए| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    इल्ज़ाम मेरे सर आए!

    चाँद जितने भी गुम हुए शब के,सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    साहू ने गिरवी रख ली!

    तारों की रौशन फ़सलें और चाँद की एक दरांती थी,साहू ने गिरवी रख ली थी मेरी रात कटाई की| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    रेत कभी तन्हाई की!

    आँखों और कानों में कुछ सन्नाटे से भर जाते हैं,क्या तुम ने उड़ती देखी है रेत कभी तन्हाई की| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    दिल की आहट!

    सीने में दिल की आहट जैसे कोई जासूस चले,हर साए का पीछा करना आदत है हरजाई की| गुलज़ार

  • 12th Sep 2024

    काल-कुएँ में गूँजती!

    नींद में कोई अपने-आप से बातें करता रहता है,काल-कुएँ में गूँजती है आवाज़ किसी सौदाई की| गुलज़ार

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