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सरकती जाए है!
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता,निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता| अमीर मीनाई
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अब अगर हमारे हुए!
वो ए’तिमाद कहाँ से ‘फ़राज़’ लाएँगे,किसी को छोड़ के वो अब अगर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
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धब्बे और तस्वीर!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| कुँवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की यह कविता – वह चित्र भी झूठा नहीं :तब प्रेम बचपन ही सहीसंसार ही जब…
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बर्बाद घर हमारे हुए!
बुझा के ताक़ की शमएँ न देख तारों को,इसी जुनूँ में तो बर्बाद घर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
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चारागर हमारे हुए!
किसी ने ग़म तो किसी ने मिज़ाज-ए-ग़म बख़्शा,सब अपनी अपनी जगह चारागर हमारे हुए| अहमद फ़राज़
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जिन्हें कोई न मिला!
अब इक हुजूम-ए-शिकस्ता-दिलाँ है साथ अपने,जिन्हें कोई न मिला हम-सफ़र हमारे हुए| अहमद फ़राज़
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बात पर हमारे हुए!
जो ग़ैर थे वो इसी बात पर हमारे हुए,कि हम से दोस्त बहुत बे-ख़बर हमारे हुए| अहमद फ़राज़