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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Apr 2025

    आफ़्ताब होना था!

    तेरे जल्वों में घिर गया आख़िर,ज़र्रे को आफ़्ताब होना था| असरार-उल-हक़ मजाज़

  • 20th Apr 2025

    ख़ून-ए-दिल भी!

    हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तिराब न पूछ,ख़ून-ए-दिल भी शराब होना था| असरार-उल-हक़ मजाज़

  • 20th Apr 2025

    कामयाब होना था!

    हुस्न को बे-हिजाब होना था,शौक़ को कामयाब होना था| असरार-उल-हक़ मजाज़

  • 20th Apr 2025

    कहते हैं मोहब्बत!

    कहते हैं मोहब्बत फ़क़त उस हाल को ‘बिस्मिल’,जिस हाल को हम उन से भी अक्सर नहीं कहते| बिस्मिल सईदी

  • 20th Apr 2025

    उषस(तीन)

    आज मैं हिंदी के विख्यात कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी की भोर पर लिखी एक और कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय  नरेश मेहता जी की यह कविता– थके गगन में उषा-गान !! तम की अँधियारी अलकों मेंकुंकम की पतली-सी रेखदिवस-देवता का लहरों…

  • 19th Apr 2025

    मुँह पर नहीं कहते!

    क्या अहल-ए-जहाँ तुझ को सितमगर नहीं कहते,कहते तो हैं लेकिन तिरे मुँह पर नहीं कहते| बिस्मिल सईदी

  • 19th Apr 2025

    मय-ख़ाने के अंदर!

    मय-ख़ाने के अंदर भी वो कहते नहीं मय-ख़्वार,जो बात कि मय-ख़ाने के बाहर नहीं कहते| बिस्मिल सईदी

  • 19th Apr 2025

    हर बार नए शौक़ से!

    हर बार नए शौक़ से है अर्ज़-ए-तमन्ना,सौ बार भी हम कह के मुकर्रर नहीं कहते| बिस्मिल सईदी

  • 19th Apr 2025

    मय-ख़ाने में हर जाम !

    का’बे ही में हर सज्दे को कहते हैं इबादत,मय-ख़ाने में हर जाम को साग़र नहिं कहते| बिस्मिल सईदी

  • 19th Apr 2025

    रिंदों को डरा सकते हैं!

    रिंदों को डरा सकते हैं क्या हज़रत-ए-वाइ’ज़,जो कहते हैं अल्लाह से डर कर नहीं कहते| बिस्मिल सईदी

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