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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Nov 2024

    दामन तर न कर दे!

    सताया जिस को हमेशा तू ने सदा अकेला जो छुप के रोया,वो दिल-जला अपने आँसुओं से तुम्हारा दामन भी तर न कर दे| क़तील शिफ़ाई

  • 5th Nov 2024

    डर है नज़र तुम्हारी!

    बड़े मज़े से मैं पी रहा हूँ मिरी तरफ़ तुम अभी न देखो,मुझे ये डर है नज़र तुम्हारी शराब को बे-असर न कर दे| क़तील शिफ़ाई

  • 5th Nov 2024

    कहीं वो दीवाना उम्र!

    क़सम जिसे ज़ब्त-ए-ग़म की दे कर उठा दिया अपने दर से तू ने,कहीं वो दीवाना उम्र अपनी बग़ैर तेरे बसर न कर दे| क़तील शिफ़ाई

  • 5th Nov 2024

    पहले सहर न कर दे!

    ये वस्ल की रात है ख़ुदारा नक़ाब चेहरे से मत हटाओ,तुम्हारे चेहरे का ये उजाला सहर से पहले सहर न कर दे| क़तील शिफ़ाई

  • 5th Nov 2024

    दर-ब-दर न कर दे!

    बना हूँ मैं आज तेरा मेहमाँ कोई अदू को ख़बर न कर दे,उठा के वो तेरी अंजुमन से कहीं मुझे दर-ब-दर न कर दे| क़तील शिफ़ाई

  • 5th Nov 2024

    वह नदी में नहा रही है!

    आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि कुमारेन्द्र पारस नाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| कुमारेन्द्र पारस नाथ सिंह जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है कुमारेन्द्र पारस नाथ सिंह जी की यह कविता –  वह नदी में नहा रही हैनदी धूप मेंऔर धूप उसके जवान…

  • 4th Nov 2024

    हर तरफ़ तारीक थी!

    हर तरफ़ तारीक थी दुनिया मगर,इक चराग़-ए-दिल था जो बुझता न था| महताब हैदर नक़वी

  • 4th Nov 2024

    कोई बेगाना न था!

    एक ही सहरा के बासी थे सभी,कोई अपना कोई बेगाना न था| महताब हैदर नक़वी

  • 4th Nov 2024

    वो दरीचा देर तक!

    इस तरफ़ ही देखता रहता था मैं,वो दरीचा देर तक खुलता न था| महताब हैदर नक़वी

  • 4th Nov 2024

    इक सितारा दिल में!

    इक सितारा दिल में रौशन था मगर,आँख ने उस को कभी देखा न था| महताब हैदर नक़वी

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