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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Apr 2025

    मुद्दत के बा’द ‘नूर’ !

    मुद्दत के बा’द ‘नूर’ हँसी लब पे आई है,वो अपना हम-ख़याल बना ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    तूफ़ाँ के बा’द मैं भी!

    तूफ़ाँ के बा’द मैं भी बहुत टूट सा गया,दरिया फिर अपने रुख़ पे बहा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    झोंका हवा का आया!

    धरती का ये सफ़र मिरा जिस दिन हुआ तमाम,झोंका हवा का आया उड़ा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    बस तेरा प्यार था जो!

    आवागमन की क़ैद से क्या छूटता कभी,बस तेरा प्यार था जो छुड़ा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    कोई चुरा ले गया मुझे!

    इक जान-दार लाश समझिए मिरा वजूद,अब क्या धरा है कोई चुरा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    हो वापसी अगर!

    हो वापसी अगर तो इन्हें रास्तों से हो,जिन रास्तों से प्यार तिरा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 23rd Apr 2025

    बादल बरसै मूसलधार!

    आज मैं हिंदी की श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। माचवे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता– बादल बरसै मूसलधारचरवाहा आमों के नीचे खड़ा किसी को रहा पुकार एक रस जीवन पावस अपरम्पारमेघों…

  • 22nd Apr 2025

    हर शाम कोई आया!

    मुद्दत से एक रात भी अपनी नहीं हुई,हर शाम कोई आया उठा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 22nd Apr 2025

    वो मना ले गया मुझे!

    अब उस को अपनी हार कहूँ या कहूँ मैं जीत,रूठा हुआ था मैं वो मना ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

  • 22nd Apr 2025

    पलकों की ओट में!

    पलकों की ओट में वो छुपा ले गया मुझे,या’नी नज़र नज़र से बचा ले गया मुझे। कृष्ण बिहारी नूर

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