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किसने ये बीमार किया
जाते जाते कोई हम से अच्छे रहना कह तो गया,पूछे लेकिन पूछने वाले किस ने ये बीमार किया| जाँ निसार अख़्तर
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तुम आज मेरे संग हंस लो।
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में आज मुकेश जी का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उन्होंने आशिक़ फिल्म के लिए गाया था- तुम आज मेरे संग हंस लो, तुम आज मेरे संग गा लो। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद ******
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तेरी सोई आँखों ने!
पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे,तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर
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राख हुआ सूर्य दिन ढले!
आज प्रस्तुत है मेरा एक पुराना नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- जला हुआ लाल कोयलाराख हुआ सूर्य दिन ढले। होली सी खेल गया दिनरीते घट लौटने लगे,दिन भर के चाव लिए मनचाहें कुछ बोल रस पगे,महानगर में उंडेल दूध,गांवों को दूधिए चले।राख हुआ सूर्य दिन ढले।। ला न सके स्लेट-पेंसिलेंतुतले आकलन के लिए,सपनीले खिलौने…
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जितने भी बदनाम हुए
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया,जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
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मुझ को ख़ुद अपनी!
मुझ को ख़ुद अपनी जवानी की क़सम है कि ये इश्क़,इक जवानी की शरारत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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एक ख़ामोश क़यामत!
दिल में वो शोरिश-ए-जज़्बात कहाँ तेरे बग़ैर,एक ख़ामोश क़यामत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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मेरी दुनिया में!
फ़ित्ना-ए-अक़्ल के जूया मिरी दुनिया से गुज़र,मेरी दुनिया में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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मय-कशी अब मिरी !
मय-कशी अब मिरी आदत के सिवा कुछ भी नहीं,ये भी इक तल्ख़ हक़ीक़त के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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कि मातम आ गया!
न शम्अ है न परवाने ये कैसा रंग-ए-महफ़िल है,कि मातम आ गया शहनाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग