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गर्मियां!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| त्रिनेत्र जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की यह कविता – गुमसुम से इस मौसम मेंजब नहीं आती हवाएँसूखे होंठों वाली पत्तियाँबार-बार चोंचें खोलती चिड़ियाएँहरियाली पर लगी फफूँद…
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सच मुझे लिखना है!
ता-कि महफ़ूज़ रहे मेरे क़लम की हुरमत,सच मुझे लिखना है मैं हुस्न को सच लिक्खूंगा। शहरयार