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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jun 2025

    गर्मियां!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| त्रिनेत्र जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय त्रिनेत्र जोशी जी की यह कविता – गुमसुम से इस मौसम मेंजब नहीं आती हवाएँसूखे होंठों वाली पत्तियाँबार-बार चोंचें खोलती चिड़ियाएँहरियाली पर लगी फफूँद…

  • 21st Jun 2025

    फिर जवाँ हो जाएँ!

    फिर जवाँ हो जाएँ दिल की हसरतेंकुछ न कुछ ऐ हमनशीं ऐसा करें । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    उनकी फ़ितरत है!

    उनकी फ़ितरत है कि वे धोखा करेंहम पे लाज़िम है कि हम सोचा करें । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    जिनको समझा था!

    शक्ल-सूरत से आदमी थे वो,जिनको समझा था आदमी हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    ख़ूब देखी है वह!

    जिसमें नफ़रत भरी जहालत थी,ख़ूब देखी है वह हँसी हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    ज़ख़्म पर जो नमक!

    ज़ख़्म पर जो नमक छिड़कते थे,उनसे कर ली थी दोस्ती हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    सच के बदले मिली!

    सच के बदले मिली जो बदनामी,वो भी झेली ख़ुशी-ख़ुशी हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    ख़मोश थी महफ़िल!

    लब सिले थे ख़मोश थी महफ़िल,अनकही बात तब कही हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    जी है जुगनू-सी !

    जी है जुगनू-सी ज़िंदगी हमने,दी अँधेरों को रोशनी हमने । हंसराज रहबर

  • 21st Jun 2025

    सच मुझे लिखना है!

    ता-कि महफ़ूज़ रहे मेरे क़लम की हुरमत,सच मुझे लिखना है मैं हुस्न को सच लिक्खूंगा। शहरयार

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