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आए हम ‘ग़ालिब’-ओ!
आए हम ‘ग़ालिब’-ओ-‘इक़बाल’ के नग़्मात के बा’द,‘मुसहफ़’-ए-इश्क़-ओ-जुनूँ हुस्न की आयात के बा’द| अली सरदार जाफ़री
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यह धरती कितना देती है!
एक बार फिर से कविताएं शेयर करने का सिलसिला छायावाद युग से शुरू कर रहा हूँ। आज मैं प्रसिद्ध हिंदी कवि स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता –…