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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jun 2025

    अब यही हो क्या!

    गाहे गाहे बस अब यही हो क्या,तुम से मिल कर बहुत ख़ुशी हो क्या| जौन एलिया

  • 23rd Jun 2025

    होते होते रौशन!

    होते होते रौशन होता है चेहरा,जाते जाते दिल से काई जाती है| अंकित गौतम

  • 23rd Jun 2025

    ट्राम में एक याद!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री ज्ञानेंद्रपति की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री ज्ञानेंद्रपति जी की यह कविता – चेतना पारीक कैसी हो?पहले जैसी हो?कुछ-कुछ ख़ुुशकुछ-कुछ उदासकभी देखती तारेकभी देखती घासचेतना पारीक, कैसी दिखती हो?अब भी कविता लिखती हो? तुम्हें मेरी…

  • 22nd Jun 2025

    ठोकर खाई जाती है!

    पत्थर ले कर आते हैं सब सीने मेंभाग जगे तो ठोकर खाई जाती है अंकित गौतम

  • 22nd Jun 2025

    सुनते हैं ये शय!

    अपनी मिट्टी अपना पानी वापस ले, सुनते हैं ये शय लौटाई जाती है| अंकित गौतम

  • 22nd Jun 2025

    दीवानों को समझाओ!

    बुल्ले-बाबा दीवानों को समझाओ,अपनी हस्ती काम में लाई जाती है| अंकित गौतम

  • 22nd Jun 2025

    अँधियारों से धूप!

    जिस्म हमारा इक ऐसी मिल है जिस में,अँधियारों से धूप बनाई जाती है| अंकित गौतम

  • 22nd Jun 2025

    रिश्तों को जब धूप!

    रिश्तों को जब धूप दिखाई जाती है,सिगरेट से सिगरेट सुलगाई जाती है| अंकित गौतम

  • 22nd Jun 2025

    परवाज़ का दावा करें !

    घोंसले में कट रही है ज़िंदगीकौन-सी परवाज़ का दावा करें । हंसराज रहबर

  • 22nd Jun 2025

    किस तरह शिकवा करें!

    जो हुआ मालूम सब मालूम है,दोस्तों से किस तरह शिकवा करें । हंसराज रहबर

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