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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jun 2025

    मगर हमें तो वही!

    वो बेवफ़ा है हमेशा ही दिल दुखाता है,मगर हमें तो वही एक शख़्स भाता है। शहरयार

  • 20th Jun 2025

    धूप सड़क की!

    आज मैं श्रेष्ठ राजस्थानी एवं हिंदी कवि स्वर्गीय हरीश भादानी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भादानी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरीश भादानी जी का यह गीत – धूप सड़क की नहीं सहेली जब कोरे मेड़ी ही कोरेछत पसरी पसवाड़े फोरेछ्जवालों से…

  • 19th Jun 2025

    रोना नसीब में है!

    रोना नसीब में है तो औरों से क्या गिला,अपने ही सर लिया कोई इल्ज़ाम रो पड़े। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    दो गाम ही चले थे!

    राह-ए-वफ़ा में हमको ख़ुशी की तलाश थी,दो गाम ही चले थे के हर गाम रो पड़े। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    हर शाम ये सवाल!

    हर शाम ये सवाल मुहब्बत से क्या मिलाहर शाम ये जवाब के हर शाम रो पड़े। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    अपनी वफ़ा का सोच!

    उल्फ़त का जब किसी ने लिया नाम रो पड़े,अपनी वफ़ा का सोच के अंजाम रो पड़े। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    एक दो रोज़ का!

    एक दो रोज़ का सदमा हो तो रो लें “फ़ाकिर”,हम को हर रोज़ के सदमात ने रोने न दिया। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    तुझसे मिलकर हमें!

    तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था,तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    रोनेवालों से कह दो!

    रोनेवालों से कह दो उनका भी रोना रोलेंजिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया। सुदर्शन फ़ाकिर

  • 19th Jun 2025

    आप कहते थे के!

    आप कहते थे के रोने से न बदलेंगे नसीब,उम्र भर आपकी इस बात ने रोने न दिया। सुदर्शन फ़ाकिर

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