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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jan 2025

    तेरी शोख़ी-ए-हिना!

    अभी और तेज़ कर ले सर-ए-ख़न्जर-ए-अदा को,मेरे ख़ूँ की है ज़रूरत तेरी शोख़ी-ए-हिना को। अली सरदार जाफ़री

  • 7th Jan 2025

    फूल से खिल गये!

    फूल से खिल गये तसव्वुर में,दामन-ए-शौक़ भर गया कोई। अली सरदार जाफ़री

  • 7th Jan 2025

    दिल को छूकर!

    गर्दिश-ए-ख़ूं रगों में तेज़ हुई,दिल को छूकर गुज़र गया कोई। अली सरदार जाफ़री

  • 7th Jan 2025

    बिखर गया कोई!

    सिर्फ़ लहरा के रह गया आँचल,रंग बन कर बिखर गया कोई। अली सरदार जाफ़री

  • 7th Jan 2025

    मियाँ ये क़र्ज़-दारी!

    जहाँ तक हो सके ‘आलम किसी से क़र्ज़ मत लेना,मियाँ ये क़र्ज़-दारी ख़ैर-ओ-बरकत छीन लेती है| आलम निज़ामी

  • 7th Jan 2025

    जन्नत छीन लेती है!

    अगर जन्नत की चाहत है तो ख़िदमत शर्त है माँ की,अगर माँ रूठ जाती है तो जन्नत छीन लेती है| आलम निज़ामी

  • 7th Jan 2025

    नज़ाकत छीन लेती है!

    भरी हो जेब तो इंसाँ नशे में चूर रहता है,ज़रा सी तंग-दस्ती सब नज़ाकत छीन लेती है| आलम निज़ामी

  • 7th Jan 2025

    जहालत आदमी से!

    ज़माने में ज़रूरी है बहुत ता’लीम का होना,जहालत आदमी से आदमियत छीन लेती है| आलम निज़ामी

  • 7th Jan 2025

    धूप!

    आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि श्री विनोद निगम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहींकी हैं।                            लीजिए आज प्रस्तुत है श्री विनोद निगम जी का यह नवगीत  – घाटियों में रितु सुखाने लगी हैमेघ धोए वस्त्र अनगिन रंग केआ गए दिन, धूप के सत्संग के पर्वतों…

  • 6th Jan 2025

    इबादत छीन लेती है|!

    रिया-कारी* से बचिए ये बहुत ज़हरीली नागिन है,ये नागिन ज़िंदगी भर की ‘इबादत छीन लेती है| *Hypocaracy आलम निज़ामी

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