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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jan 2025

    साए को तरस जाएगा!

    मरहला रात का जब आएगा,जिस्म साए को तरस जाएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 20th Jan 2025

    राणाप्रताप की तलवार!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा अपनी ओजपूर्ण रचनाओं के लिए ख्यातिप्राप्त स्वर्गीय श्यामनारायण पांडेय जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।                            लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय श्यामनारायण पांडेय जी की यह कविता – चढ़ चेतक पर तलवार उठा,रखता था भूतल पानी को।राणा…

  • 19th Jan 2025

    आग का दरिया देखूँ|!

    टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    और भी तुझ सा देखूँ!

    तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    ख़्वाब बन कर तिरी!

    मैं ने जिस लम्हे को पूजा है उसे बस इक बार,ख़्वाब बन कर तिरी आँखों में उतरता देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    फूल की तरह मिरे!

    फूल की तरह मिरे जिस्म का हर लब खुल जाए,पंखुड़ी पंखुड़ी उन होंटों का साया देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    मुझ पे छा जाए वो!

    मुझ पे छा जाए वो बरसात की ख़ुश्बू की तरह,अंग अंग अपना इसी रुत में महकता देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    एक बच्चे की तरह से!

    सब ज़िदें उस की मैं पूरी करूँ हर बात सुनूँ,एक बच्चे की तरह से उसे हँसता देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    हर रोज़ तमाशा देखूँ!

    बंद कर के मिरी आँखें वो शरारत से हँसे,बूझे जाने का मैं हर रोज़ तमाशा देखूँ| परवीन शाकिर

  • 19th Jan 2025

    जाने क्यूँ तेरे लिए!

    तू मिरा कुछ नहीं लगता है मगर जान-ए-हयात,जाने क्यूँ तेरे लिए दिल को धड़कना देखूँ| परवीन शाकिर

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