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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Jul 2025

    ग़म की पासबानी है!

    दिल मिरा और ये ग़म-ए-दुनिया,क्या तिरे ग़म की पासबानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    नौ-जवानी है!

    उन से ऐसे में जो न हो जाए,नौ-जवानी है नौ-जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    रोइए तो पानी है!

    ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा,और अगर रोइए तो पानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    कहानी बहुत पुरानी है!

    आज भी सुन रहे हैं क़िस्सा-ए-इश्क़,गो कहानी बहुत पुरानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    दिल उसी ग़म की!

    दोनों आलम हैं जिस के ज़ेर-ए-नगीं,दिल उसी ग़म की राजधानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    हर कहानी मिरी !

    आप-बीती कहो कि जग-बीती,हर कहानी मिरी कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    वो कभी रंग वो कभी!

    वो कभी रंग वो कभी ख़ुशबू,गाह गुल गाह रात-रानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    अपनी भी बात मानी!

    वो भला मेरी बात क्या माने,उस ने अपनी भी बात मानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    किस तरह जीते हैं!

    आज रफी साहब का गाया हुआ एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे फिल्म ‘नई रोशनी’ के लिए राजेंदर कृष्ण जी ने लिखा था और इसका संगीत रवि जी ने तैयार किया था। वास्तव में बहुत सी बार ऐसा लगता है कि कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाते कि ज़िंदगी किस तरह जी जाए,…

  • 1st Jul 2025

    मेहरबानी है!

    बे-नियामेहरबानी हैज़ाना सुन लिया ग़म-ए-दिल,मेहरबानी है,मेहरबानी है | फ़िराक़ गोरखपुरी

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