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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Nov 2019

    बहती हवा – रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 14th Nov 2019

    भारत का सिंहद्वार!

    मुंबई में दूसरा दिन निकल गया, कहीं ज्यादा निकलने की हिम्मत नहीं हुई। फिर सोचा कि शुरुआत अगर की जाए कुछ देखने की, शेयर करने की, तो प्रवेश स्थल से ही की जाए न। एक ऐसा प्रवेश द्वार जो सौ वर्ष से अधिक समय से, जलमार्ग द्वारा मुंबई, जो कि पहले बंबई थी वहाँ, बल्कि…

  • 12th Nov 2019

    लबों पे तराने अब आ न सकेंगे!

    मुंबई मे हूँ, यहाँ जो कुछ देख पाऊंगा उस पर लिखूंगा, इससे पहले आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- आज मुकेश जी की गाई हुई दो प्रायवेट गज़लें शेयर कर रहा हूँ, ऐसी पहचान रही है मुकेश जी की, कि उन्होंने जो कुछ गाया उसको अमर कर दिया। उनके गायन…

  • 11th Nov 2019

    मुंबई फिर एक बार!

    लंबे समय के बाद एक बार फिर मुंबई जा रहा हूँ। बहुत पहले मुंबई में दो बार रहा हूँ, एक बार 2000 से 2001 तक, एक वर्ष अंधेरी (पूर्व) में, पवई में रहा था और उसके बाद 2012 में शायद 3 महीने तक अंधेरी (पश्चिम) में रहा था। तब मैं ब्लॉग नहीं लिखता था, इसलिए…

  • 10th Nov 2019

    घर तक की यात्रा – रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 9th Nov 2019

    Life- a celebration of gratitude.

    I remember a description of a character from a novel by late Mohan Rakesh Ji. He wrote about the convent school where the hero of the novel studied and he remembers the character – a priest in the boarding school church, who always prayed for the sins of all to be pardoned, which prayer was…

  • 8th Nov 2019

    बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला!

    आज डॉ. बशीर बद्र जी की एक गज़ल याद आ रही है, डॉ. बद्र शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं, इस गज़ल में भी उन्होंने कुछ बहुत अच्छे शेर कहे हैं। यह भी जीवन की एक सच्चाई है कि बहुत सी बार जब हम ज़िंदगी में जो कुछ तलाश करते हैं, वही …

  • 7th Nov 2019

    मेरे जीवन के स्वामी- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 6th Nov 2019

    ये दिल्ली है बाबू!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     दिल्ली में मेरा जन्म हुआ, 30 वर्ष की आयु तक मैं दिल्ली में ही रहा, शुरू की 2-3 नौकरियां भी वहीं कीं और सेवानिवृत्ति के बाद भी लगभग 7 वर्ष तक, दिल्ली के पास गुड़गांव में रहा। इसलिए कह सकता हूँ कि…

  • 5th Nov 2019

    सपने- लैंग्स्टन ह्यूजिस की कविता

    आज, मैं विख्यात अंग्रेजी कवि लैंग्स्टन ह्यूजिस की एक छोटी सी परंतु महत्वपूर्ण संदेश वाली कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’…

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