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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Oct 2019

    Being Contributing Members of Society!

    It is our life and we choose a role for ourselves and that determines what success means to us and it may be quite different from others. There are so many things which frame our personality, it starts with the ‘Samskaaras’ the values which we imbibe from our family and the atmosphere of initial neighborhood,…

  • 21st Oct 2019

    खगोलशास्त्री- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 19th Oct 2019

    रोशनी को शहर से निकाला गया!

    कभी हुआ कि घर में कामवाली अपने साथ अपने 5-6 साल के बेटे को ले आई, वह बच्चा घर में इधर-उधर घूमता है, कमर से हाथ पीछे करके निरीक्षण करता है, ये अच्छी बात है कि उसको यह एहसास नहीं है कि यहाँ उसकी मां की स्थिति क्या है! मुझे कभी लगता है कि मेरा…

  • 18th Oct 2019

    जो एक सपना अपनाए!

    आज फिर से सपनों की बात करते हैं, सपने वे जो हम अपने जीवन के बारे में जीते-जागते देखते हैं, इतने कि वे हमारी नींद के दौरान भी आने के लिए मज़बूर हो जाएं। मेरा सपना रहा है हमेशा से क्रिएटिव राइटिंग के क्षेत्र में नाम कमाने का। ऐसा नहीं है कि जीवन में कुछ…

  • 17th Oct 2019

    किस्सा मत्स्य कन्या का!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, कल मैंने ज़िक्र किया था कि दो ऐसी पोस्ट हैं, जो रहस्य से जुड़ी हैं, ऐसी जिनके बारे में शायद आपने सुना हो या पढ़ा हो कि ऐसा होता है, आज उनमें से ही, मेरे एक मित्र के संस्मरण के रूप में, लीजिए प्रस्तुत…

  • 16th Oct 2019

    इच्छाधारी सर्प !

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ, असल में दो ऐसी पोस्ट हैं, जो रहस्य से जुड़ी हैं, ऐसी जिनके बारे में शायद आपने सुना हो या पढ़ा हो कि ऐसा होता है, लेकिन यहाँ मेरे एक मित्र के संस्मरण के रूप में है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट-…

  • 15th Oct 2019

    समय पर कविता- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 14th Oct 2019

    मेरे सपनों से मगर!

    अभी कहीं यह उल्लेख हुआ था कि ‘राइटर्स ब्लॉक’ को तोड़ने के लिए, मतलब कि अगर आप कुछ नया नहीं लिख पा रहे हों, तो आपको अपने कोई स्वप्न याद करने चाहिएं और उनको लिख डालना चाहिए, अब यह फैसला आप बाद में कर सकते हैं कि उसको शेयर करना है या नहीं, हाँ इससे…

  • 13th Oct 2019

    थोड़ी दूर साथ चलो!

    आज ज़नाब अहमद फराज़ साहब की लिखी एक गज़ल याद आ रही है, जिसे गुलाम अली साहब ने बहुत सुंदर ढंग से गाया है। इस छोटी सी गज़ल में बहुत गहरी बात,अहमद फराज़ साहब ने बहुत सरल अंदाज़ में कह दी हैं, आइए इस गज़ल का आनंद लेते हैं-   कठिन है राह-गुज़र थोड़ी देर…

  • 12th Oct 2019

    ताऊ जी!

      आज ताऊ जी के बारे में कुछ बात कर लेते हैं।     ताऊ जी, हमारे बहुत पहले छूटे हुए गांव के एक ऐसे कैरेक्टर हैं, जिनको शुरू से ही घूमना, विशेष रूप से शहर की रौनक देखना पसंद रहा है। ताऊ जी जब घर में आते हैं तो थोड़ा बहुत गांव भी घर…

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