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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Nov 2019

    ‘यदि’ – रुड्यार्ड किप्लिंग की कविता

    आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद…

  • 2nd Nov 2019

    Festival celebrations-Now and Then!

    Festivities, celebrations are a part of human life and more so in Indian society. We have people following so many religious beliefs and so many festivals are observed in India. Not only based on religions but based on regions also several festivals are observed here. Like Onam, Jalikattu is also an activity associated with some…

  • 1st Nov 2019

    अगला किनारा- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 31st Oct 2019

    आजकल वो इस तरफ देखता है कम!

    आज मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है, राज कपूर साहब द्वारा अभिनीत इस फिल्म- ‘फिर सुबह होगी’ का यह गीत साहिर लुधियानवी जी ने लिखा है और इसे मुकेश जी ने खय्याम साहब के संगीत में गाया है। असल में यह गीत आज के हालात पर बहुत सुंदर व्यंग्य…

  • 30th Oct 2019

    पुरातन और नूतन – गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 29th Oct 2019

    What Is Success As A Blogger?

    I remember a movie song from Hindi film- ‘Jis Desh Mein Ganga Behti Hai’ by Raj Kapur Ji. What all happens in that film is not, what I am discussing, just a song from that film comes to my mind, the hero wanders in streets, composes his songs and sings them for the people-  …

  • 28th Oct 2019

    नग़मों की खिलती कलियां चुनने वाले!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ- अज्ञेय जी की एक कविता है-‘नए कवि से’, काफी लंबी कविता है, उसका कुछ हिस्सा यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ-   आ, तू आ, हाँ, आ, मेरे पैरों की छाप-छाप पर रखता पैर, मिटाता उसे, मुझे मुँह भर-भर गाली देता- आ, तू आ।  …

  • 26th Oct 2019

    क्या दीप जलाएं हम, तक़दीर ही काली है!

    दीपावली के अवसर पर, एक बार फिर से मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है। दीपावली भी हमारी खुशियों को जाहिर करने का एक अवसर है, हम जितने अधिक खुश होंगे, उतने ही अधिक उत्साह के साथ हम इन त्यौहारों के अवसर पर उल्लास के साथ भाग लेंगे।…

  • 25th Oct 2019

    घर – गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की कविता

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 23rd Oct 2019

    अपना घर तो गिरा, दरोगा के घर नए उठे!

      आज डॉ. शांति सुमन जी का लिखा एक नवगीत याद आ रहा है, जो बहुत साल पहले झारखंड में आयोजित एक कवि सम्मेलन में पहली बार उनके मुंह से सुना था। उस समय मैं हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की मुसाबनी माइंस में कार्यरत था, जो काफी पहले बंद हो चुकी हैं, यह शायद 1984-85 की…

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