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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Jul 2025

    न हमेशा लड़ा करो!

    क्या हर्ज है जो दिल की भी सुन लो कभी कभी,यूँ अपने आप से न हमेशा लड़ा करो| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

  • 3rd Jul 2025

    जीना है ख़ूब औरों की!

    जीना है ख़ूब औरों की ख़ातिर जिया करो,इक-आध साँस ख़ुद भी तो लेते रहा करो| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

  • 3rd Jul 2025

    नींद है कहानी है!

    कुछ न पूछो ‘फ़िराक़’ अहद-ए-शबाब,रात है नींद है कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    अब तो मैं हूँ और!

    सूनी दुनिया में अब तो मैं हूँ और,मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    ज़िंदगी इंतिज़ार है!

    ज़िंदगी इंतिज़ार है तेरा,हम ने इक बात आज जानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    बूँद में भी वो!

    बहर-ए-हस्ती भी जिस में खो जाए,बूँद में भी वो बे-करानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    बद-गुमानी है!

    कोई इज़हार-ए-ना-ख़ुशी भी नहीं,बद-गुमानी सी बद-गुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    आँख की जवानी है!

    मय-कदों के भी होश उड़ने लगे,क्या तिरी आँख की जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    ऐ लब-ए-नाज़!

    ऐ लब-ए-नाज़ क्या हैं वो असरार,ख़ामुशी जिन की तर्जुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद

    आज एक बार फिर मैं अपना किया हुआ एक प्रसिद्ध कविता का अनुवाद दोहरा रहा हूँ। आज मैं अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग…

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