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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Apr 2025

    घिरा जा रहा हूँ!

    ग़ज़ब हो गया उन की महफ़िल से आना,घिरा जा रहा हूँ तमाशाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 13th Apr 2025

    नया तरीका!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ जनकवि बाबा नागार्जुन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नागार्जुन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है नागार्जुन जी की यह कविता – दो हज़ार मन गेहूँ आया दस गाँवों के नामराधे चक्कर लगा काटने, सुबह हो गई शाम सौदा पटा…

  • 12th Apr 2025

    तुम भी हो रुस्वाइयों में

    मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो, मिरे साथ तुम भी हो रुस्वाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    न रंगीनियों में!

    न रंगीनियों में न रानाइयों में,नज़र घिर गई अपनी परछाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    चंद अंगड़ाइयों में!

    न आया मज़ा शब की तन्हाइयों में,सहर हो गई चंद अंगड़ाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    वही सरकार हो जाए!

    मोहब्बत से तुम्हें सरकार कहते हैं वगरना हम,निगाहें डाल दें जिस पर वही सरकार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं!

    वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं बे-शक अगर ज़ंजीर बन जाएँ,मोहब्बत ज़हर है बे-शक अगर आज़ार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    मिरा दीदार हो जाए!

    ज़माने को तमन्ना है तिरा दीदार करने की,मुझे ये फ़िक्र है मुझ को मिरा दीदार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    ज़माने से कहो कुछ!

    ज़माने से कहो कुछ साइक़ा-रफ़्तार हो जाए,हमारे साथ चलने के लिए तय्यार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 12th Apr 2025

    सियाही ख़ून बन जाए!

    सलाम उस पर अगर ऐसा कोई फ़नकार हो जाए,सियाही ख़ून बन जाए क़लम तलवार हो जाए| कैफ़ भोपाली

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