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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Apr 2025

    एक मुश्त-ए-ख़ाक!

    एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में है,ज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआ’रा देखना| परवीन शाकिर

  • 14th Apr 2025

    आइने की आँख ही!

    आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए,जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना| परवीन शाकिर

  • 14th Apr 2025

    ख़ून में डूबा हुआ!

    जब बनाम-ए-दिल गवाही सर की माँगी जाएगी,ख़ून में डूबा हुआ परचम हमारा देखना| परवीन शाकिर

  • 14th Apr 2025

    भूल जाओ वामन!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवियित्री सुश्री नीलम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नीलम जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री नीलम सिंह जी की यह कविता – नहीं काट सकतेअतल में धँसीमेरी जड़ों कोतुम्हारी नैतिकता केजंग लगे भोथरे हथियार मत आँको मेरा…

  • 13th Apr 2025

    अपना सितारा देखना!

    किस शबाहत को लिए आया है दरवाज़े पे चाँद, ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना| परवीन शाकिर

  • 13th Apr 2025

    जाते जाते उस का वो!

    यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर,जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना| परवीन शाकिर

  • 13th Apr 2025

    मैं समुंदर देखती हूँ!

    बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना, मैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना| परवीन शाकिर

  • 13th Apr 2025

    तो सारा ज़माना है!

    वो ऐ ‘कैफ़’ जिस दिन से मेरे हुए हैं,तो सारा ज़माना है शैदाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 13th Apr 2025

    मिरे दिल की चीख़ें!

    अरे सुनने वालो ये नग़्मे नहीं हैं,मिरे दिल की चीख़ें हैं शहनाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 13th Apr 2025

    नज़र लग न जाए!

    इधर आओ तुम को नज़र लग न जाए,छुपा लूँ तुम्हें दिल की गहराइयों में| कैफ़ भोपाली

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