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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Apr 2025

    ये एक पल है उसे!

    अदम हयात से पहले अदम हयात के बा’द,ये एक पल है उसे जावेदाँ बनाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Apr 2025

    आ गया है जहाँ में!

    अब आ गया है जहाँ में तो मुस्कुराता जा,चमन के फूल दिलों के कँवल खिलाता जा| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Apr 2025

    मैं ये उमीद लिए!

    कभी तो मेरी भी सुनवाई होगी महफ़िल में,मैं ये उमीद लिए बार बार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 16th Apr 2025

    अजब सा चैन था!

    अजब सा चैन था हम को कि जब थे हम बेचैन,क़रार आया तो जैसे क़रार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 16th Apr 2025

    केवल दो गीत लिखे!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। राजन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राजेंद्र राजन जी का यह गीत– केवल दो गीत लिखे मैंनेइक गीत तुम्हारे मिलने काइक गीत तुम्हारे खोने का। सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरोंनदियों-नदियों, लहरों-लहरोंविश्वास…

  • 15th Apr 2025

    सीने में इक आग थी!

    कभी जो सीने में इक आग थी वो सर्द हुई, कभी निगाह में जो था शरार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 15th Apr 2025

    ख़ुमार जाता रहा!

    किसी की आँख में मस्ती तो आज भी है वही, मगर कभी जो हमें था ख़ुमार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 15th Apr 2025

    ख़ुलूस तो है मगर!

    खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा,ख़ुलूस तो है मगर ए’तिबार जाता रहा| जावेद अख़्तर

  • 15th Apr 2025

    अगर हो रात लिखूँ!

    जाने ये कैसा दौर है जिस में जुरअत भी तो मुश्किल है,दिन हो अगर तो उस को लिखूँ दिन रात अगर हो रात लिखूँ| जावेद अख़्तर

  • 15th Apr 2025

    फ़िरक़े ज़ात लिखूँ!

    अपनी अपनी तारीकी को लोग उजाला कहते हैं,तारीकी के नाम लिखूँ तो क़ौमें फ़िरक़े ज़ात लिखूँ| जावेद अख़्तर

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