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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Jul 2025

    अरे सुनने वालो!

    अरे सुनने वालो ये नग़्मे नहीं हैं,मिरे दिल की चीख़ें हैं शहनाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 18th Jul 2025

    ज़रा मिल तो जाएँ!

    मोहब्बत है या आज तर्क-ए-मोहब्बत,ज़रा मिल तो जाएँ वो तन्हाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 18th Jul 2025

    दीवार की मरम्मत!

    आज एक पुरानी पोस्ट दोहराने का दिन है। आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को पसंद नहीं करता,वह, उसके नीचे जमी…

  • 17th Jul 2025

    ग़ज़ब हो गया!

    ग़ज़ब हो गया उन की महफ़िल से आना,घिरा जा रहा हूँ तमाशाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    मिरे साथ तुम भी!

    मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो,मिरे साथ तुम भी हो रुस्वाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    न रंगीनियों में!

    न रंगीनियों में न रानाइयों में,नज़र घिर गई अपनी परछाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    चंद अंगड़ाइयों में!

    न आया मज़ा शब की तन्हाइयों में,सहर हो गई चंद अंगड़ाइयों में| कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    मोहब्बत से तुम्हें!

    मोहब्बत से तुम्हें सरकार कहते हैं वगरना हम,निगाहें डाल दें जिस पर वही सरकार हो जाए| कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    मोहब्बत ज़हर है!

    वो ज़ुल्फ़ें साँप हैं बे-शक अगर ज़ंजीर बन जाएँ,मोहब्बत ज़हर है बे-शक अगर आज़ार* हो जाए| *Addiction कैफ़ भोपाली

  • 17th Jul 2025

    मिरा दीदार हो जाए!

    ज़माने को तमन्ना है तिरा दीदार करने की,मुझे ये फ़िक्र है मुझ को मिरा दीदार हो जाए| कैफ़ भोपाली

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