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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Jul 2025

    चमक देखनी हीरे की!

    चमक देखनी हीरे की,पृष्ठ भूमि अंधियारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 11th Jul 2025

    मन का पलड़ा भारी!

    डंडी देख तराज़ू की,मन का पलड़ा भारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 11th Jul 2025

    आकाशदीप!

    एक बार फिर से आज मैं वरिष्ठ हिंदी कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– जलता रहता सारी रात एक आस मेंमेरे आँगन का आकाशदीप । पीले अक्षत…

  • 10th Jul 2025

    वर्तमान से यारी रख!

    भूत, भविष्यत जाने दे,वर्तमान से यारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 10th Jul 2025

    चलने की तैयारी रख!

    ठहर मुसाफिरखाने में,चलने की तैयारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 10th Jul 2025

    यादें मधुर संजोने को!

    यादें मधुर संजोने को,मन में एक अलमारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 10th Jul 2025

    दुनिया दारी रख!

    थोड़ी दुनिया दारी रख,प्यार मुहब्बत जारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 10th Jul 2025

    आँगन में फुलवारी!

    बाहर खेती-बारी रख,आँगन में फुलवारी रख। उदयप्रताप सिंह

  • 10th Jul 2025

    वो मिरा घर है!

    किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं ‘अमीर’,वो मिरा घर है रहे जिस में मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई

  • 10th Jul 2025

    तेरी तस्वीर में!

    हुस्न और इश्क़ हम-आग़ोश नज़र आ जाते,तेरी तस्वीर में खिंच जाती जो हैरत मेरी| अमीर मीनाई

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