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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Jul 2025

    यार पहलू में है!

    यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले,आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी| अमीर मीनाई

  • 10th Jul 2025

    बेदर्द नज़ाकत मेरी!

    मैं ने आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी खेंचा तो कहा,पिस गई पिस गई बेदर्द नज़ाकत मेरी| अमीर मीनाई

  • 10th Jul 2025

    प्रवचन!

    एक बार फिर से आज मैं वरिष्ठ हिंदी कवि श्री रामदरश मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता– टी.वी. खोलते हीचैनलों पर बाबाओं के जलवे दिखाई पड़ने लगते हैंतरह-तरह के संत-वेश धारण किये…

  • 9th Jul 2025

    हँस के फ़रमाते हैं!

    हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी, क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    बर्क़-जमाल अच्छा है!

    बर्क़ अगर गर्मी-ए-रफ़्तार में अच्छी है ‘अमीर’,गर्मी-ए-हुस्न में वो बर्क़-जमाल अच्छा है| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    आँखें दिखलाते हो !

    आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब,वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    दिल में जम जाए!

    आ गया उस का तसव्वुर तो पुकारा ये शौक़,दिल में जम जाए इलाही ये ख़याल अच्छा है| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    देख ले बुलबुल ओ!

    देख ले बुलबुल ओ परवाना की बेताबी को,हिज्र अच्छा न हसीनों का विसाल अच्छा है| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    एक सवाल अच्छा है!

    तुझ से माँगूँ मैं तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए,सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है| अमीर मीनाई

  • 9th Jul 2025

    हम मरे जाते हैं!

    अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है,हम मरे जाते हैं तुम कहते हो हाल अच्छा है| अमीर मीनाई

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