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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jul 2025

    पलकों के साए में!

    घनी मस्त पलकों के साए में नज़रें,बहकते हुए मय-कदों में शराबी| नज़ीर बनारसी

  • 8th Jul 2025

    आज पानी गिर रहा है!

    आज हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी के बारे में बात करने का मन हो रहा है, जिन्हे हम भवानी दादा के नाम से भी याद रखते हैं। मुझे याद है जब मैं दिल्ली में था और मैंने नया-नया ही कविताएं लिखना शुरू किया था तब मै एक गोष्ठी में गया था,…

  • 7th Jul 2025

    फ़लक पर ये किसने!

    निचोड़ो कोई बढ़ के दामन शफ़क़ का,फ़लक पर ये किस ने गिरा दी गुलाबी| नज़ीर बनारसी

  • 7th Jul 2025

    शराबी से मिलता है!

    जवानी में इस तरह मिलती हैं नज़रें,शराबी से मिलता है जैसे शराबी| नज़ीर बनारसी

  • 7th Jul 2025

    बदलता है हर दौर !

    बदलता है हर दौर के साथ साक़ी,ये दुनिया है कितनी बड़ी इंक़िलाबी| नज़ीर बनारसी

  • 7th Jul 2025

    वो आँखें गुलाबी!

    वो आँखें गुलाबी और ऐसी गुलाबी,कि जिस रुत को देखें बना दें शराबी| नज़ीर बनारसी

  • 7th Jul 2025

    आँखों में डोरे गुलाबी!

    हैं यूँ मस्त आँखों में डोरे गुलाबी, शराबी के पहलू में जैसे शराबी| नज़ीर बनारसी

  • 7th Jul 2025

    हुजूम-ए-ख़्वाब लिए!

    अजब नहीं कहीं ताबीर कोई मिल जाए, भटक रहा हूँ गिरह में हुजूम-ए-ख़्वाब लिए| नज़ीर क़ैसर

  • 7th Jul 2025

    हवाएँ फिरती हैं!

    हवाएँ फिरती हैं रस्तों में बाल खोले हुए, ये रात सर पे खड़ी है कोई अज़ाब लिए| नज़ीर क़ैसर

  • 7th Jul 2025

    कोई सितारा लिए!

    उभर रहे हैं कई हाथ शब के पर्दे से,कोई सितारा लिए कोई माहताब लिए| नज़ीर क़ैसर

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