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तेरी सोई आँखों ने तो!
पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे,तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर
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जितने भी बदनाम हुए!
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया,जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
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फ़ख़्र करते थे कभी!
अब उन्हें पहचानते भी शर्म आती है हमें,फ़ख़्र करते थे कभी जिन की मुलाक़ातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर
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ये है दुबई मरीना!
दुबई में इस बार हम दुबई मरीना गए, जो समुद्र तट पर मानव निर्मित मरीना (वाटरफ्रंट) है जिसमें ऊंची ऊंची आकर्षक इमारतें हैं, बहुत सुंदर नावें, वाटर स्पोर्ट्स हैं, घूमने के लिए भी यह स्थान अत्यंत सुंदर है। इस इलाके में नगर के सबसे महंगे होटल हैं, सामान्य लोग इस क्षेत्र में रहने की सोच…
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चाँदनी रातों पे हम!
ज़ुल्फ़ से छनती हुई उस के बदन की ताबिशें,हँस दिया करते थे अक्सर चाँदनी रातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर
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मुफ़्त का इल्ज़ाम!
कोई भी मौसम हो दिल की आग कम होती नहीं,मुफ़्त का इल्ज़ाम रख देते हैं बरसातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर
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खिली है दिल में!
खिली है दिल में किसी के बदन की धूप ‘शकेब’,हर एक फूल सुनहरा दिखाई देता है| शकेब जलाली
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ज़मीं से हर कोई !
सिमट के रह गए आख़िर पहाड़ से क़द भी,ज़मीं से हर कोई ऊँचा दिखाई देता है| शकेब जलाली