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हक़ीक़त और बढ़ती!
बुझाने को हवा के साथ गर बारिश भी आ जाए,चराग़-ए-बे-हक़ीक़त की हक़ीक़त और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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कोई जब रास्ता रोके!
सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है,कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है| नवाज़ देवबंदी
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आज फिर बादल घिरे हैं!
अपनी एक नई रचना आज शेयर कर रहा हूँ- आज फिर बादल घिरे हैं। हूँ नहीं वह यक्ष जिसकी यक्षिणी करती प्रतीक्षा, है नहीं संदेश कोई भेजने की तनिक इच्छा, हर दिशा में दिग्विजय के अश्व देते हैं दिखाई, और अपनी ही दशा पर आ रही फिर-फिर रुलाई, बालपन के करुण पल बन स्वप्न आंखों…
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बोल ना मेरे यारा!
कैसे हो सकता है जो कुछ भी मैं चाहूँ, बोल ना मेरे यारा कैसे हो सकता है| जव्वाद शैख़
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वो भी सिर्फ़ हमारा!
हम भी कैसे एक ही शख़्स के हो कर रह जाएँ,वो भी सिर्फ़ हमारा कैसे हो सकता है| जव्वाद शैख़