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कुछ देखना नहीं है!
दुनिया का हर नज़ारा निगाहों से छीन ले,कुछ देखना नहीं है तुझे देख कर मुझे| क़मर जलालाबादी
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गीत एक अनवरत नदी है!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीत कवि स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। उमाकांत मालवीय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – गीत एक अनवरत नदी हैकुठिला भर नेकी हैसूप भर बदी है एक तीर…
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ले जा रहा है कौन!
दुनिया को भूल कर तिरी दुनिया में आ गया,ले जा रहा है कौन इधर से उधर मुझे| क़मर जलालाबादी
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ऐ बेवफ़ा दिखा तो!
हर हर क़दम पे साथ हूँ साया हूँ मैं तिरा,ऐ बेवफ़ा दिखा तो ज़रा भूल कर मुझे| क़मर जलालाबादी
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चाहा तुझे तो ख़ुद से!
चाहा तुझे तो ख़ुद से मोहब्बत सी हो गई,खोने के बाद मिल गई अपनी ख़बर मुझे| क़मर जलालाबादी