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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Mar 2025

    एक एक पर देखा!

    उस परिंदे को चोट आई तो,आप ने एक एक पर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 11th Mar 2025

    गालियों में बड़ा असर!

    नालियों में हयात देखी है,गालियों में बड़ा असर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 11th Mar 2025

    रास्ता अगर देखा!

    रास्ता काट कर गई बिल्ली,प्यार से रास्ता अगर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 11th Mar 2025

    ठहरा हुआ सफ़र!

    पाँव टूटे हुए नज़र आए,एक ठहरा हुआ सफ़र देखा| दुष्यंत कुमार

  • 11th Mar 2025

    वीरान अपना घर!

    आज वीरान अपना घर देखा,तो कई बार झाँक कर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 11th Mar 2025

    कुछ देखना नहीं है!

    दुनिया का हर नज़ारा निगाहों से छीन ले,कुछ देखना नहीं है तुझे देख कर मुझे| क़मर जलालाबादी

  • 11th Mar 2025

    गीत एक अनवरत नदी है!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ नवगीत कवि स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। उमाकांत मालवीय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।         लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – गीत एक अनवरत नदी हैकुठिला भर नेकी हैसूप भर बदी है एक तीर…

  • 10th Mar 2025

    ले जा रहा है कौन!

    दुनिया को भूल कर तिरी दुनिया में आ गया,ले जा रहा है कौन इधर से उधर मुझे| क़मर जलालाबादी

  • 10th Mar 2025

    ऐ बेवफ़ा दिखा तो!

    हर हर क़दम पे साथ हूँ साया हूँ मैं तिरा,ऐ बेवफ़ा दिखा तो ज़रा भूल कर मुझे| क़मर जलालाबादी

  • 10th Mar 2025

    चाहा तुझे तो ख़ुद से!

    चाहा तुझे तो ख़ुद से मोहब्बत सी हो गई,खोने के बाद मिल गई अपनी ख़बर मुझे| क़मर जलालाबादी

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