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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd May 2025

    दूर की सदा क्या है!

    उदास रात की ख़ामोशियों में ऐ ‘क़ैसर’,क़रीब आती हुई दूर की सदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 22nd May 2025

    धुआँ नहीं न सही!

    धुआँ नहीं न सही आग तो नज़र आए,यूँ चुपके चुपके सुलगने से फ़ाएदा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 22nd May 2025

    सवाल सा क्या है!

    तुझे पसंद कहाँ हाल पूछना मेरा,तिरी निगाह में लेकिन सवाल सा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 22nd May 2025

    जवाँ है पेड़ मगर!

    रहेगी धूप मिरे सर पे आख़िरी दिन तक,जवाँ है पेड़ मगर उस का आसरा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 22nd May 2025

    देखूँ कि इंतिहा क्या है!

    अभी तो काट रही है हर एक साँस की धारअज़ल जब आए तो देखूँ कि इंतिहा क्या है क़ैसर शमीम

  • 22nd May 2025

    मैं न भूला!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामनरेश पाठक जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। पाठक जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामनरेश पाठक जी की यह कविता – मैं न भूला,है न छूटी राह,मेरे पास हर दिन तोनया अर्थ आ लगा है;इति नहीं…

  • 21st May 2025

    पलट के देखने वाले!

    नज़र की धुँद में हैं भूली-बिसरी तस्वीरें,पलट के देखने वाले ये देखना क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st May 2025

    खंडर खंडर है यहाँ!

    शिकस्ता ख़्वाब के मलबे में ढूँढता क्या है, खंडर खंडर है यहाँ धूल के सिवा क्या है| क़ैसर शमीम

  • 21st May 2025

    हुई कौन सी ख़ता!

    ऐसी वो भारी मुझ से हुई कौन सी ख़ता,जिस से ये दिल उदास हुआ जी उचट गया| नज़ीर अकबराबादी

  • 21st May 2025

    इख़्लास हम से कम!

    जब मैं ने उस सनम से कहा क्या सबब है जान,इख़्लास हम से कम हुआ और प्यार घट गया| नज़ीर अकबराबादी

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