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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Aug 2025

    किसे तुमने लिखा था!

    वो ख़त पागल हवा के आँचलों पर,किसे तुम ने लिखा था याद होगा| बशीर बद्र

  • 14th Aug 2025

    वो चेहरा बुझ रहा था!

    उदासी और बढ़ती जा रही थी,वो चेहरा बुझ रहा था याद होगा| बशीर बद्र

  • 14th Aug 2025

    कोई आँसू गिरा था!

    बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें,कोई आँसू गिरा था याद होगा| बशीर बद्र

  • 14th Aug 2025

    टहनी पर फूल जब खिला!

    एक बार फिर से आज मैं, श्रेष्ठ हिंदी नवगीत कवि स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ। मालवीय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – टहनी पर फूल जब खिलाहमसे देखा नहीं गया । एक फूल…

  • 13th Aug 2025

    कोई तुम से मिला था!

    बहुत से उजले उजले फूल ले कर,कोई तुम से मिला था याद होगा| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    तुम्हारा फ़ैसला था!

    मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा,तुम्हारा फ़ैसला था याद होगा| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    तिरा हम-सफ़र कहाँ है!

    उन्हीं रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे,मुझे रोक रोक पूछा तिरा हम-सफ़र कहाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    मैं इसी गुमाँ में बरसों !

    मैं इसी गुमाँ में बरसों बड़ा मुतमइन रहा हूँ,तिरा जिस्म बे-तग़य्युर मिरा प्यार जावेदाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    वही ग़म का आसमाँ है!

    मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफ़र में,वही दुख-भरी ज़मीं है वही ग़म का आसमाँ है| बशीर बद्र

  • 13th Aug 2025

    ये जनम जनम का रिश्ता!

    कभी पा के तुझ को खोना कभी खो के तुझ को पाना,ये जनम जनम का रिश्ता तिरे मेरे दरमियाँ है| बशीर बद्र

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