Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 15th Aug 2025

    कब कहाँ उड़ जाएँ!

    बिखर बिखर सी गई है किताब साँसों की,ये काग़ज़ात ख़ुदा जाने कब कहाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी

  • 15th Aug 2025

    ज़मीं से एक तअल्लुक़!

    ज़मीं से एक तअल्लुक़ ने बाँध रक्खा है,बदन में ख़ून नहीं हो तो हड्डियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी

  • 15th Aug 2025

    हैं उतनी तेज़ हवाएँ!

    ख़ुदा का शुक्र कि मेरा मकाँ सलामत है,हैं उतनी तेज़ हवाएँ कि बस्तियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी

  • 15th Aug 2025

    कविता- स्वाधीनता दिवस

    सभी मित्रों को स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई। इस अवसर पर मेरी कुछ भावनाएं इस गीत के माध्यम से प्रस्तुत हैं- बाधाओं को दूर भगाएंआजादी का पर्व मनाएं। हम हैं सदा विश्व हितकारी, मानवता पहचान हमारी, हम चाहतेरहें सब मिलकरचिंताएं समाप्त हों सारी विश्व पटल पर भारतवासीएक नई पहचान बनाएं। जितने अनुसंधान हुए हैं, भारतीय…

  • 14th Aug 2025

    ये सर्द रातें भी बनकर!

    ये सर्द रातें भी बन कर अभी धुआँ उड़ जाएँ, वो इक लिहाफ़ मैं ओढूँ तो सर्दियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी

  • 14th Aug 2025

    मुझे अब देख कर!

    मुझे अब देख कर हँसती है दुनिया,मैं सब के सामने रोने लगा था| राहत इंदौरी

  • 14th Aug 2025

    उसे चेहरे पे शक!

    वो अब आईने धोता फिर रहा है,उसे चेहरे पे शक होने लगा था| राहत इंदौरी

  • 14th Aug 2025

    चुराता हूँ अब आँखें!

    चुराता हूँ अब आँखें आइनों से,ख़ुदा का सामना होने लगा था| राहत इंदौरी

  • 14th Aug 2025

    मैं आँखें खोल कर !

    लगे रहते थे सब दरवाज़े फिर भी,मैं आँखें खोल कर सोने लगा था| राहत इंदौरी

  • 14th Aug 2025

    आबरू खोने लगा था!

    वो इक इक बात पे रोने लगा था,समुंदर आबरू खोने लगा था| राहत इंदौरी

←Previous Page
1 … 329 330 331 332 333 … 1,527
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar