Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 26th May 2025

    हवा ने वार किया!

    हवा ने वार किया तो जवाब पाएगी,कि हम चराग़ भी तूफ़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 26th May 2025

    पहचान ले के आए हैं!

    हम अपने-आप की पहचान ले के आए हैं,नए सुख़न नए इम्कान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 26th May 2025

    तेरे शहर से हो कर!

    तेरे शहर से हो कर आई तेज़ हवा,फिर दिल की बुनियाद हिला कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 26th May 2025

    फालतू चीज़!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि श्री विष्णु नागर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नागर जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री विष्णु नागर जी की यह कविता – घर में कोई चीज़फालतू नहीं थीटूटा कंघा लगता थाअमर हैभरोसा था अब खोएगा भी नहीं…

  • 25th May 2025

    जीत मगर हम से!

    एक से बढ़ कर एक थे दाँव शराफ़त के, जीत मगर हम से कतरा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 25th May 2025

    अब के चराग़ों ने!

    अब के चराग़ों ने चौंकाया दुनिया को,आँधी आख़िर में झुँझला कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 25th May 2025

    गुड़ियों का अम्बार!

    बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन,गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 25th May 2025

    वो भी लड़ते लड़ते!

    वो भी लड़ते लड़ते जग से हार गया,चाहत भी घर-बार लुटा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 25th May 2025

    रोने की तरकीब!

    रोने की तरकीब हमारे आई काम,ग़म की मिट्टी पानी पा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

  • 25th May 2025

    दुनिया तो अफ़्वाह!

    खोज रहा है आज भी वो गूलर का फूल,दुनिया तो अफ़्वाह उड़ा कर बैठ गई| इरशाद ख़ान सिकंदर

←Previous Page
1 … 325 326 327 328 329 … 1,447
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,131 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar