-
प्यास मिट जाए तो!
उन की आँखों से रखे क्या कोई उम्मीद-ए-करम,प्यास मिट जाए तो गर्दिश में वो जाम आते हैं| क़तील शिफ़ाई
-
चुप!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। केदारनाथ अग्रवाल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता – चुप भी एक पौधा हैपत्थर का बना हुआआँसू पर उगा हुआदीपक पर खड़ा हुआवायु…
-
सिर्फ़ आँसू जहाँ!
प्यार की राह में ऐसे भी मक़ाम आते हैं,सिर्फ़ आँसू जहाँ इंसान के काम आते हैं| क़तील शिफ़ाई
-
कि फ़त्ह पा कर भी!
‘क़तील’ मुझ को यही सिखाया मिरे नबी ने,कि फ़त्ह पा कर भी दुश्मनों को सज़ा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
बहिश्त ऐसी!
जहाँ रिफ़ाक़त हो फ़ित्ना-पर्दाज़ मौलवी की,बहिश्त ऐसी किसी को मेरे ख़ुदा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
सज़ा गुनाहों की देना!
सज़ा गुनाहों की देना उस को ज़रूर लेकिन,वो आदमी है तुम उस की अज़्मत घटा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
तुम ऐसे पत्थर को!
वो जिस की ठोकर में हो सँभलने का दर्स शामिल,तुम ऐसे पत्थर को रास्ते से हटा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
ख़ुलूस को जो!
ख़ुलूस को जो ख़ुशामदों में शुमार कर लें,तुम ऐसे लोगों को तोहफ़तन भी वफ़ा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
वो सामने आए भी तो!
उसे मना कर ग़ुरूर उस का बढ़ा न देना,वो सामने आए भी तो उस को सदा न देना| क़तील शिफ़ाई
-
कुहरा उठा!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदार नाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। केदार नाथ सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। यह रचना अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल थी। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदार नाथ सिंह जी का यह नवगीत…