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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Mar 2025

    अपनी शिकायत!

    देख लेना बड़ी तस्कीन मिलेगी तुम को,ख़ुद से इक रोज़ कभी अपनी शिकायत करना| लियाक़त जाफ़री

  • 18th Mar 2025

    दिल की तख़्ती पे भी!

    दिल की तख़्ती पे भी आयात लिखी रहती हैं,वक़्त मिल जाए तो उन की भी तिलावत करना| लियाक़त जाफ़री

  • 18th Mar 2025

    सुरमई आँख हसीं!

    सुरमई आँख हसीं जिस्म गुलाबी चेहरा,इस को कहते हैं किताबत पे किताबत करना| लियाक़त जाफ़री

  • 18th Mar 2025

    बंधुआ मज़दूर!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कैलाश वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। कैलाश वाजपेयी जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।        लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कैलाश वाजपेयी जी की यह कविता – अरे तू काहे को रोता हैयहाँ कुछ ख़त्म नहीं होता      छूट रही नहीं कोई संपदा   यों…

  • 17th Mar 2025

    मोहब्बत में सियासत!

    जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को,इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना| लियाक़त जाफ़री

  • 17th Mar 2025

    दो बार मोहब्बत!

    कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना,एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना| लियाक़त जाफ़री

  • 17th Mar 2025

    वो नज़र फिर गई!

    और क्यूँ छेड़ती है गर्दिश-ए-चर्ख़,वो नज़र फिर गई ये क्या कम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Mar 2025

    और तेरी निगाह भी!

    यूँ भी दिल में नहीं वो पहली उमंग,और तेरी निगाह भी कम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Mar 2025

    वो ज़ुल्फ़ बरहम है!

    जैसे उछले जुनूँ की पहली शाम,इस अदा से वो ज़ुल्फ़ बरहम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Mar 2025

    ये मेहरबानियाँ तेरी!

    आह ये मेहरबानियाँ तेरी,शादमानी की आँख पुर-नम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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