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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Feb 2026

    होश वालों को खबर क्या!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में एक प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे निदा फाज़ली साहब ने लिखा था और सरफरोश फिल्म के लिए जतिन-ललित के संगीत निर्देशन में जगजीत सिंह जी ने गाया था- होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज़ है! आशा है आपको यह पसंद…

  • 8th Feb 2026

    महक उठे गांव-गांव!

    आज एक बार फिर मैं मेरे अत्यंत प्रिय गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। किशन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी का यह नवगीत– महक उठे गांव-गांवले पुबांव से पछांवबहक उठे आज द्वार, देहरी अँगनवा ।…

  • 7th Feb 2026

    ज़ेहन-ओ-दिल मेरे!

    रात भर सोचता रहा तुझ को,ज़ेहन-ओ-दिल मेरे रात भर महके| नवाज़ देवबंदी

  • 7th Feb 2026

    शाम महके तिरे!

    शाम महके तिरे तसव्वुर से,शाम के बा’द फिर सहर महके| नवाज़ देवबंदी

  • 7th Feb 2026

    तेरे आने की जब!

    तेरे आने की जब ख़बर महके,तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके| नवाज़ देवबंदी

  • 7th Feb 2026

    चोटी के कवि!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में काका हाथरसी जी की एक छोटी सी कविता ‘चोटी के कवि’ प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद । ******

  • 7th Feb 2026

    इमामत क्या करेंगे!

    लगाएँ जो सरों की बाज़ियाँ ये काम उन का है,इमामत क्या करेंगे झुक के पानी माँगने वाले। मंज़र भोपाली

  • 7th Feb 2026

    चांद को क्या मालूम!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया ‘लाल बंगला’ फिल्म का यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलशन बावरा जी ने लिखा था और उषा खन्ना जी ने इसका संगीत दिया था- चांद को क्या मालूम चाहता है उसे कोई चकोर! आशा है आपको यह पसंद…

  • 7th Feb 2026

    कहानी माँगने वाले!

    कोई तख़्लीक़ हो ख़ून-ए-जिगर से जन्म लेती है,कहानी लिख नहीं सकते कहानी माँगने वाले। मंज़र भोपाली

  • 7th Feb 2026

    गांव के घर से

    आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- बेखौफ चले आइएयहाँ अभी भी कुछ लोग हैं।घर की दीवारों पर जो स्वास्तिक चिह्न बने हैं,इन्हीं पर कई बार टूटी हैं चूड़ियां,टकराए हैं माथे।कभी यह एक जीवंत गांव था,लेकिन आज, हर जीवित गंध- एक स्मारक है,जमीन का हर टुकड़ा, लोगों की…

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