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कोई और छाँव देखेंगे!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय ताराप्रकाश जोशी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। ताराप्रकाश जोशी जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ताराप्रकाश जोशी जी की यह कविता – कोई और छाँव देखेंगेलाभों घाटों की नगरी तजचल दें, और गाँव देखेंगे । सुबह सुबह…
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वक़्त बदला तो तिरी!
मेरी ग़ुर्बत को शराफ़त का अभी नाम न दे,वक़्त बदला तो तिरी राय बदल जाएगी| निदा फ़ाज़ली
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सितम के दौर में हम!
सितम के दौर में हम अहल-ए-दिल ही काम आए,ज़बाँ पे नाज़ था जिन को वो बे-ज़बाँ निकले| साहिर लुधियानवी
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उधर भी ख़ाक उड़ी!
उधर भी ख़ाक उड़ी है इधर भी ख़ाक उड़ी,जहाँ जहाँ से बहारों के कारवाँ निकले| साहिर लुधियानवी
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अब मत सोचो!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। ठाकुर प्रसाद सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद सिंह जी का यह नवगीत – अब मत सोचो प्रिय रे, अब मत सोचोआँखों के जल को…
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ख़्वाब राएगाँ निकले!
हक़ीक़तें हैं सलामत तो ख़्वाब बहुतेरे,मलाल क्यूँ हो कि कुछ ख़्वाब राएगाँ निकले| साहिर लुधियानवी