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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Jun 2025

    झूट बोला है कोई!

    झूट बोला है कोई आईना,वर्ना पत्थर में कैसे बाल आया| राहत इंदौरी

  • 12th Jun 2025

    ज़िंदगी भर न ये!

    ज़िंदगी किस तरह गुज़ारते हैं,ज़िंदगी भर न ये कमाल आया| राहत इंदौरी

  • 12th Jun 2025

    नेकियों में डाल आया!

    कौन दरियाओं का हिसाब रखे,नेकियाँ नेकियों में डाल आया| राहत इंदौरी

  • 12th Jun 2025

    ज़िंदा रहने का!

    बैठे बैठे कोई ख़याल आया,ज़िंदा रहने का फिर सवाल आया| राहत इंदौरी

  • 12th Jun 2025

    शराब पी के बड़े!

    शराब पी के बड़े तज्रबे हुए हैं हमें,शरीफ़ लोगों को हम मशवरा नहीं देंगे| राहत इंदौरी

  • 12th Jun 2025

    जीवन विष पीते बीता!

    आज मैं अपने एक मित्र और श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का एक नवगीत  शेयर कर रहा हूँ| निर्मम जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का यह नवगीत – रोग बहुत हैंलेकिन उनका कहीं निदान नहीं । ये कैसी अनहोनीजीवन विष पीते…

  • 11th Jun 2025

    कि हम फ़क़ीर तुझे!

    यहाँ कहाँ तिरा सज्जादा आ के ख़ाक पे बैठ,कि हम फ़क़ीर तुझे बोरिया नहीं देंगे| राहत इंदौरी

  • 11th Jun 2025

    वो रास्ता नहीं देंगे!

    रिवायतों की सफ़ें तोड़ कर बढ़ो वर्ना,जो तुम से आगे हैं वो रास्ता नहीं देंगे| राहत इंदौरी

  • 11th Jun 2025

    जो दर खुला है!

    हमें तो सिर्फ़ जगाना है सोने वालों को,जो दर खुला है वहाँ हम सदा नहीं देंगे| राहत इंदौरी

  • 11th Jun 2025

    हों लाख ज़ुल्म मगर!

    हों लाख ज़ुल्म मगर बद-दु’आ नहीं देंगे,ज़मीन माँ है ज़मीं को दग़ा नहीं देंगे| राहत इंदौरी

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