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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Oct 2025

    शायरी से गुज़र!

    रंग अब और है ज़माने का,शायरी से गुज़र कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    मय मयस्सर मगर!

    पीने वाले तो मिल ही जायेंगे,मय मयस्सर मगर कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    दर्द को दिल से!

    दर्द को दिल से लब पै न ला सके,बेबसी इस कदर कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    ये ख़ता उम्र भर!

    मेरी मस्ती मुआफ़ कर देना,ये ख़ता उम्र भर कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    जाने सहर कहाँ होगी!

    रात काटी तेरे ख़यालों में,अब न जाने सहर कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    तुमको मेरी ख़बर!

    तुमको मेरी ख़बर कहाँ होगी,ऐसी मुझमें नज़र कहाँ होगी। बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    अंधियारे सपनों के संग जिए!

    आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक कवि मित्र का गीत शेयर कर रहा हूँ जो मैंने लगभग 45 वर्ष पहले सुना था। गीत रिकॉर्ड करते समय मैं एक पंक्ति सही नहीं बोल पाया था, वह थी ‘ शहनाई को तरुण हृदय के क्रंदन बांट दिए, गजरे तारों वाले भुला दिए’। लीजिए आज…

  • 16th Oct 2025

    होंगे सुक़रात!

    हम तो अपने सनम के शैदा हैं,होंगे सुक़रात, क्या करे कोई? बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    फिर मुलाक़ात क्या!

    आलमे दो जहाँ में रोशन हूँ,फिर मुलाक़ात, क्या करे कोई? बलबीर सिंह रंग

  • 16th Oct 2025

    दिल की बातें!

    प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कितने पिछड़े हो तुम प्रियअब भी दिल की बातें करते हो, यह सारा जग है विनिमय काकेवल बुद्धि यहाँ चलती है,यहाँ सभी को दिलवालों की बुद्धिहीनता ही खलती है, किस दुनिया में रहते हो तुमकिस जग में विचरण करते हो। मंडी लगी यहाँ उन्नति…

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