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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Feb 2026

    स्कूल की घंटी बजा दे!

    कोई स्कूल की घंटी बजा दे,ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है| शकील जमाली

  • 12th Feb 2026

    डम डम डिगा डिगा!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं , अपने स्वर में मुकेश जी का गाया फिल्म-छलिया का यह गीत शेयर कर रहा हूँ,-डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा-भीगा आशा है आपको यह पसंद आएगाधन्यवाद। *******

  • 12th Feb 2026

    आशियाना चाहता है!

    सफ़र से लौट जाना चाहता है,परिंदा आशियाना चाहता है| शकील जमाली

  • 12th Feb 2026

    हो गई है पीर पर्बत!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं दुष्यंत कुमार जी की आपातकाल में लिखी गई रचनाओं में से एक अत्यंत लोकप्रिय ग़ज़लके दो शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- गई है पीर पर्बत सी पिघलनी चाहिए! आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद । *****

  • 12th Feb 2026

    बैठ के खाने के लिए!

    जी तो कहता है कि बिस्तर से न उतरूँ कई रोज़,घर में सामान तो हो बैठ के खाने के लिए| शकील जमाली

  • 12th Feb 2026

    शब्दों की किरचें!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अश्वघोष जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अश्वघोष जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अश्वघोष जी की यह कविता– मन में पड़े थे टूटे हुए शब्दजब तक मैं उनको जोड़ताचुभने लगीं शब्दों की किरचें मुक्ति…

  • 11th Feb 2026

    नफ़रतें बेचने वालों!

    नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है,माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए| शकील जमाली

  • 11th Feb 2026

    मैं उसे ढूँढ रहा हूँ!

    हो गई है मिरी उजड़ी हुई दुनिया आबाद,मैं उसे ढूँढ रहा हूँ ये बताने के लिए| शकील जमाली

  • 11th Feb 2026

    खिलौने को बचाने के लिए!

    मैं ने हाथों से बुझाई है दहकती हुई आग,अपने बच्चे के खिलौने को बचाने के लिए| शकील जमाली

  • 11th Feb 2026

    कौन सा शहर उजाड़ोगे!

    किन ज़मीनों पे उतारोगे अब इमदाद का क़हर,कौन सा शहर उजाड़ोगे बसाने के लिए| शकील जमाली

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